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सर्व समाज जनहित मंच की विशेष बैठक में भुवनेश सूद ने सुक्खू सरकार द्वारा भांग को वैज्ञानिक रूप से वैध करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक ऐतिहासिक फैसला है और केरल और हिमाचल दो ऐसे राज्य हैं जहां पर मेडिसिनल प्लांट्स या औषधीय प्लांट्स की प्राकृतिक देन है।
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भांग की खेती से हिमाचल के किसानों और सरकार को कई लाभ हो सकते हैं। इससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है और सरकार को राजस्व में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, भांग से बनने वाले उत्पादों जैसे कि कपड़े, दवाइयां, और कागज़ से रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
जर्मन टेक्नीक की मदद से भांग की खेती किसानों के लिए और भी लाभकारी हो सकती है। इससे भांग की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, जर्मन टेक्नीक से भांग की खेती में उपयोग होने वाले बीज और अन्य सामग्री की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है।
भांग एक औषधीय पौधा है जिसमें कई प्रकार के यौगिक होते हैं जो विभिन्न बीमारियों के इलाज में मदद कर सकते हैं। यहाँ कुछ बीमारियां हैं जिनमें भांग से ठीक होने की संभावना है:
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां
1. *चिंता और तनाव*: भांग में मौजूद यौगिकों का उपयोग चिंता और तनाव को कम करने के लिए किया जा सकता है।
2. *अवसाद*: भांग के यौगिक अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
3. *नींद की समस्याएं*: भांग का उपयोग नींद की समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है।
4. *पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)*: भांग के यौगिक PTSD के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
5. *सिज़ोफ्रेनिया*: भांग के यौगिक सिज़ोफ्रेनिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
6. *बाइपोलर डिसऑर्डर*: भांग के यौगिक बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
7. *एंग्जाइटी डिसऑर्डर*: भांग के यौगिक एंग्जाइटी डिसऑर्डर के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
8. *ओब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर*: भांग के यौगिक ओब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
9. *पैनिक अटैक*: भांग के यौगिक पैनिक अटैक के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
10. *सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर*: भांग के यौगिक सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां
1. *कैंसर*: भांग के यौगिक कैंसर के इलाज में मदद कर सकते हैं।
2. *मल्टीपल स्केलेरोसिस*: भांग के यौगिक मल्टीपल स्केलेरोसिस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
3. *पार्किंसंस रोग*: भांग के यौगिक पार्किंसंस रोग के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
4. *एचआईवी/एड्स*: भांग के यौगिक एचआईवी/एड्स के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
5. *गठिया*: भांग के यौगिक गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
6. *माइग्रेन*: भांग के यौगिक माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
7. *पेट की समस्याएं*: भांग के यौगिक पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
8. *हृदय रोग*: भांग के यौगिक हृदय रोग के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
9. *मधुमेह*: भांग के यौगिक मधुमेह के लक्षणों को कम करने में।
अत: सरकार को चाहिए कि इस औषधीय प्लांट से दवाइयां या अन्य उत्पाद बनाने के लिए इस प्लांट की खेती वैज्ञानिक रुप और विश्वस्तरीय तकनीक से की जाए ताकि हिमाचल और इसके लोग आर्थिक रुप से मजबूत हो सकें।
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