छाले

0

छाले

मैं तो भाई अपनी मर्जी का ही फकीर हूं,
अपने दिल पर पड़े छालों की लकीर हूं,
गम देने वाले गम देते गए हम सहते रहे
क्यों दोष देता फिरूंअपनी भी जमीर है।

छोड़ कर चले गए वे तो बस चले ही गए,
हम तड़पे जरूर मगर होशोहवास में रहे,
गम देने वाले गम देते गए हम सहते रहे
साथ छोड़ गए मगर हम फिर चलते रहे।

आप करते रहते हैं मेरी हौसलाआफसाई,
कुछ पास रहते कुछ रहते बहुत दूर भाई,
आपसे क्या करूं मैं कोई गिला शिकवा,
दम तो है आपमें जो छोड़ गए वे दूर भाई।

कर्नल जसवन्त सिंह चन्देल
कलोल बिलासपुर हिमाचल।

Mob…. 9418425568

Leave A Reply