दामन में दाग, डॉ सत्येन्द्र शर्मा द्वारा

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दामन में दाग

नया जमाना आया प्यारे ,
गद्दारों का खोटों का ।
बोरी भर भर नोट जले थे ,
था पहाड़ यह नोटों का ।।

खूब चढ़ावा चढ़ता नित-नित ,
न्यायाधीश बने बैठे ।
न्याय पलटते रहते हरदम ,
फिरते हो ऐंठे ऐंठे ।।

पाखंडी ने न्याय किया जो ,
सिंहासन का खेला है ।
डाकू-चोर कर रहे मस्ती ,
दुख जनता ने झेला है ।।

कत्ल कर दिया जीत गये वो ,
जीते थे वो ही हारे ।
फूटी किस्मत के मारे हैँ,
बैठे रोते बेचारे ।।

दामन दागदार है काला ,
कैसे इसे मिटाओगे ।
साबुन कितना तुम रगड़ोगे ,
कैसे दाग छुड़ाओगे ।।

खूब कटा दी नाक न्याय की ,
आखिर कब स्तीफा दोगे ।
न्याय रो रहा पड़ा चौक पर ,
कर्मों के फल भोगोगे ।।

स्वरचित, मौलिक 26-03-25
डा.सत्येन्द्र शर्मा,पालमपुर, हिमाचल।

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