रोटेरियन डॉ. शिव कुमार- अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाजसेवी की मूर्ति स्थापित की जाए रोटरी भवन पालमपुर और रोटरी आई हॉस्पिटल मारंडा में : राजेश सूर्यवंशी, चेयरमैन, मिशन अगेंस्ट करप्शन

Rotarians और शुभचिंतकों से आगे आने की अपील, अब नहीं तो कभी नहीं, ख़ाक में मिल कर रह जाएंगे डॉ. शिव के सपने

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*जब तक सूरज-चांद रहेगा

डॉ शिव का नाम रहेगा*

“रोटरी इंटरनेशनल संस्था की  पालमपुर में नींव रख कर इसे स्थापित करने वाले, उसका प्रचार-प्रसार करने वाले, कठिन परिश्रम के परिणामस्वरूप लोगों को जागृत कर उन्हें रोटरी के साथ जोड़ कर स्थायी सदस्य बनाने वाले तथा उसे बुलंदियों तक ले जाने वाले डॉ. शिव कुमार के नाम को हम गुमनामी के अंधेरों में नहीं डूबने देंगे।” हमारी यह कोशिश रहेगी कि डॉ शिव की आदमकद मूर्ति को रोटरी क्लब पालमपुर और रोटरी आई हॉस्पिटल मारंडा में स्थापित किया जाए।”

ये उद्गार मिशन अगेंस्ट करप्शन हिमाचल प्रदेश के चेयरमैन व अंतर्राष्ट्रीय ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश के प्रदेश महासचिव राजेश सूर्यवंशी ने प्रकट किए।

उन्होनें कहा कि डॉ शिव कुमार जिन्हें हम प्यार से दुनिया डॉ. शिव कह कर आज भी बुलाती है, उच्च कोटि के समाजसेवी थे। जिनका फ़क़त नाम ही समाजसेवा का पर्याय बन चुका था। जब भी कभी डॉ शिव का नाम आता है तो समाजसेवा उनके साथ जुड़ी नज़र आती है। समाजसेवा के इस जज़्बे को कोटि-कोटि प्रणाम!

 ‘सांसों का क्या भरोसा रुक जाएं कब कहां पर , कुछ काम कर जा ऐसा तेरा नाम हो बुलंदियों पर ”

जी हां , स्वर्गीय पूजनीय डाक्टर शिव जी अपने आखिरी सांसों तक ऐसा ही तो कर के गए हैं , उनके जनता की सेवा के काम ऐसे हैं कि वो शारीरिक रूप में हमसे बिछुड़े हैं। अपने कामों की वजह से वो हमेशा हमारे बीच हैं। नफ़रत, दुश्मनी, कट्टरता और आपसी रंजिश की भावना से कोसों दूर निःस्वार्थ भाव से निरीहजनों, लाचारों, बेसहारों और ज़रूरतमंद लोगों का सच्चा मसीहा हमसे रूठ कर कहीं दूर जा बैठा है और देख रहा है कि उनका कौन सा क़रीबी उनके साथ विश्वासघात कर रहा है और कौन सा उनके साथ स्नेह का बर्ताव करते हुए उनके समाजसेवा के क्रम को ईमानदारी और निष्ठाभाव से जनहित में आगे की ओर ले जा रहा है। पूरा जीवन ही बिना किसी लालच के गुज़ार दिया जनता की सेवा में।

ये होता है इंसानियत का असली रूप और ये सौ प्रतिशत सही है कि जब तक सूरज चांद रहेगा डाक्टर शिव जी का नाम रहेगा , भगवान जी से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना के साथ साथ एक सवाल भी रहेगा कि हमारे पालमपुर को दूसरा डाक्टर शिव कुमार मिलेगा क्या ? 

डॉ शिव ने आई हॉस्पिटल का निर्माण करवाया, रोटरी भवन बनवाया, वृद्धाश्रम बनवाया, महिला आईटीआई बनाया, बेसहारा और मंदबुद्धि बच्चों को सहारा दिया, स्त्रियों व बच्चों के लिए अस्पताल बनवाया, ज्ञानोपार्जन के केंद्र खोले।

सिर्फ एक महान सोच के स्वामी ने। कहां मिलेंगे ऐसे महान व्यक्तित्व के स्वामी, ऐसे डॉ शिव जिनकी मृत्यु के बाद उनके बैंक एकाउंट में मात्र डेढ़ लाख रुपए निकले जबकि केवल विधायक की पेंशन से ही वह अपना और अपने परिवार का जीवन-यापन करते रहे। वह और उनकी धर्मपत्नी उस समय के एमबीबीएस डॉक्टर रहे हैं जब इस तरह के किसी डॉक्टर का पालमपुर में नामोनिशान भी नहीं था। जनसेवा करके, एक सच्चे डॉक्टर की भूमिका अदा करके उन्होंने जो नाम कमाया वही जनता का आशीर्वाद बनके उनके काम आया। लेकिन जनता की सेवा की ललक ऐसी लगी कि उन्होंने अपनी डॉक्टरी प्रैक्टिस को भी जनसेवा की भेंट चढ़ाया।

डॉ शिव ने अगर एक व्यवसाई के रूप में पैसा कमाने के लिए काम किया होता तो आज उनका अरबों रुपए का अपना ही सरमाया होता। 

डॉ शिव बार-बार राष्ट्रीय सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष बनते रहे, केवल सेवा की भावना के बूते पर।

उल्लेखनीय है कि 35 वर्ष तक जब भी दी पालमपुर रोटरी आई फाउंडेशन के चुनाव हुए, वह निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाते रहे। हालांकि वह चकाचौंध की दुनिया से दूर रह कर जनसेवा करना चाहते थे। चेयरमैन बनकर सेवा करना उनके स्वभाव का हिस्सा कतई नहीं था। लेकिन उनके प्रेमी, उनके शुभचिंतक, उनके सच्चे साथी उन्हें चेयरमैन बनाते रहे क्योंकि उनसे बढ़ कर सेवा करने का जज़्बा शायद विरले लोगों में ही होता है।

आपको बताते चलें कि डॉ शिव वोह शख्सियत थे जिन्होंने अपने 35 वर्ष के चेयरमैन के कार्यकाल चेयरमैन पद की आड़ में किसी से अपनी निजी रंजिश नहीं निकाली, बल्कि दुश्मनों का भी उद्धार किया। अगर हम सब अपने भीतर झाँक कर देखें तो हम पाएंगे कि हम में उनके जैसा क्या एक भी गुण विद्यमान है?

क्या आपने कोई ऐसा डॉक्टर देखा है जो बिना पैसे लिए, 10-15 किलोमीटर जाकर मुफ्त में ईलाज कर देता हो, हां, वह सिर्फ डॉ शिव ही हो सकते थे।

अपने गुस्से, अहंकार, नफरत और निजी स्वार्थों को ताक पर रख कर कार्य करना डॉ शिव जैसे व्यक्ति ही सकते थे।

यही कारण रहा कि वह एक स्थान पर न रुक कर निरंतर समाजसेवा में उन्नति ही करते गए।

पाठकों की पुरजोर मांग पर, उनके ढेरों लेखों की बिनाह पर ही में इस लेख को लिखने की सामर्थ्य रख पाया हूँ। सभी शुभचिंतकों का यही मानना है कि डॉ शिव द्वारा बनाए गए सभी संस्थानों में डॉ शिव की आदमकद मूर्ति स्थापित की जाए ताकि आने वाली नस्लें उनकी निःस्वार्थ जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर जनसेवा को और आगे ले जाने में सक्षम हो सकें।

“मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि काश कोई चमत्कार हो और एक और डॉ शिव का अवतार हो”

तभी तो जन जन में नव चेतना का संचार होगा, असहायों का उद्धार होगा, नए अस्पताल बनेंगे, बेसहारों और बुजुर्गों का बेड़ापार होगा।

कुछ कमज़ोर लोग थोड़ी सी इज़्ज़त नसीब होने पर अपने पारिवारिक सदस्यों की उचित-अनुचित ज़िद्द के आगे नतमस्तक होकर अपने पद का दुरुपयोग कर, अपने आत्मसम्मान को गिरवी रख कर उन्हें लाभ पहुंचाने हेतु अपने आत्म सम्मान का भी बलिदान कर देते हैं, लेकिन डॉ शिव न जाने किस मिट्टी के बने थे कि जाते समय भी अपने परिवार के बारे में बिना कुछ सोचे , सर्वस्व जनता को समर्पित कर गए। लोगों से मांग मांग कर अरबों रुपये की संपत्ति जनता की भलाई हेतु छोड़ गए और परिवार को दे गए दो कमरों का छोटा सा घर।

डॉ शिव के बारे में कुछ लिखना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है, मेरी लेखनी में इतनी ताकत नहीं कि इस महान व्यक्तित्व की विशेषताओं का वर्णन कर सके लेकिन फिर भी एक बात कहना चाहूंगा कि रोटरी और इससे जुड़ी तमाम संस्थाओं को डॉ शिव का सम्मान करते हुए एक आवाज़ उठानी चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाजसेवी डॉ शिव की आदमकद मूर्ति कम से कम रोटरी भवन पालमपुर और रोटरी आई हॉस्पिटल मारंडा के मुख्य गेट पर स्थापित की जाए ताकि इस महान आत्मा के लिए थोड़ा सा सम्मान तो संस्था प्रेषित कर सके।

इतना ही नहीं डॉ शिव तो जनसेवा के चक्कर में अपना नाम भी अधूरा ही छोड़ गए। लोग “शर्मा” या कुछ और विशेष सर नेम या जातिसूचक शब्द को अपने नाम के साथ चिपका कर कई अनुचित लाभ लेने की फ़िराक में रहते हैं लेकिन एक डॉक्टर शिव थे जिन्होंने अपने नाम के साथ “शर्मा” शब्द भी हटा डाला। यानि डॉ शिव कुमार शर्मा नहीं कहलाए बल्कि डॉ शिव ही कहलाकर जनता जा स्नेह पाना उचित समझा। इससे यह स्पष्ट होता है कि डॉक्टर शिव किसी एक जाति-सम्प्रदाय के न होकर पूरे समाज को अपना समझते थे, बिना किसी भेदभेव के, बिना किसी ism (इज़्म) के।

अब देखना यह है कि रोटरी अपने जन्मदाता के सपनों को साकार करने और उन्हें सम्मान देने में कितना साहस दिखाती है?

कृपया सभी सम्माननीय रोटेरियन इस ओर ध्यान देने की कृपा करें।

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