














अगर आज राधा सूद पालमपुर की मेयर होतीं तो…


पालमपुर नगर निगम में पिछले काफी समय से व्याप्त भ्रष्टाचार, तानाशाही, अव्यवस्था के फलस्वरूप जो दयनीय स्थिति उत्पन्न हुई है उस पर नज़र दौड़ाते हुए आज मैं कुछ शब्द लिखने के लिए मजबूर हूं ।
पालमपुर नगर निगम की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें, तो साफ नजर आता है कि नेतृत्व की कुशलता और अनुभव का अभाव नगर निगम को पीछे धकेल रहा है। पालमपुर जैसे सुंदर और संभावनाओं से भरे क्षेत्र को दिशा देने वाले एक योग्य नेता की जरूरत हमेशा से रही है। यदि राधा सूद इस बार पालमपुर नगर निगम की मेयर होतीं, तो यह क्षेत्र आज विकास के नए आयाम छू रहा होता।

राधा सूद ने अपने नगर परिषद अध्यक्ष के कार्यकाल में पालमपुर को जिस तरह संवारा, वह हिमाचल प्रदेश के लिए एक मिसाल है।
उनके नेतृत्व में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए हिमाचल सरकार ने पालमपुर नगर परिषद को एक करोड़ रुपये का इनाम दिया था। उनके कार्यकाल में वार्डों में साफ-सफाई, सड़क निर्माण, और जल निकासी जैसी आधारभूत समस्याओं का सफलतापूर्वक समाधान हुआ। उन्होंने गरीबों के सुख-दुख में हमेशा साथ देकर यह साबित किया कि एक नेता केवल कुर्सी का अधिकारी नहीं, बल्कि जनता की मां के समान होना चाहिए।
दुर्भाग्य से, राधा सूद इस बार पालमपुर की मेयर नहीं बन सकीं। वर्तमान में पालमपुर नगर निगम का नेतृत्व अनुभवहीन और दिशाहीन व्यक्तियों के हाथ में है, जिनकी अक्षमता का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है।
नगर निगम के अंतर्गत आने वाले वार्डों में समस्याओं का अंबार है। लोगों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने वाला कोई नहीं है। भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है, और हर कोई अपनी-अपनी डफली बजाने में व्यस्त है।
जनता को आज भी राधा सूद की याद आती है। जब वह नगर परिषद की अध्यक्ष थीं, तो हर कोई बिना झिझक अपनी समस्या उनके पास लेकर जाता था, और वह तत्परता से समाधान करती थीं।
पालमपुर की जनता भगवान से प्रार्थना कर रही है कि राधा सूद एक बार फिर मेयर बनकर आएं और इस क्षेत्र को स्वर्ग बना दें। पालमपुर को ऐसे ही सशक्त नेतृत्व की जरूरत है, जो जनता के हित में काम करे, न कि केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए।




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